जब धरती में कंपन होता है तो वह भूकंप (earth quake) कहलाता है। बहुत लोग इसे धरती डोलना अथवा भूचाल के नाम से भी पुकारते हैं।

दोस्तों, क्रस्ट एवं ऊपरी मैन्टल कोर को लिथोस्फेयर पुकारा जाता है। यह दरअसल, 50 किलोमीटर की कई वर्गों में बंटी हुई एक मोटी परत होती है।

इन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है। भू-विशेषज्ञों के अनुसार हमारी पूरी धरती 12 टैक्टोनिक प्लेटों (tactonic plates) पर स्थित है।

धरती के नीचे मौजूद ये प्लेटें बेहद धीमी रफ्तार से घूमती रहती हैं। भूवैज्ञानिक अध्ययनों (geographical studies) के अनुसार ये प्लेटें अपने स्थान से प्रतिवर्ष 4-5 मिमी खिसक जाती हैं।

इस दौरान कोई प्लेट किसी के नीचे से खिसकती है, तो कोई दूर हो जाती है। ऐसे में जब प्लेटें आपस में टकराती हैं तो इनसे जबरदस्त ऊर्जा निकलती है।

जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। दबाव अधिक बनने से प्लेट्स टूटने लग जाती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती है, जिससे भूकंप आता है।

मित्रों, आपको जानकारी दे दें भूंकप की तीव्रता की माप का पैमाना रिक्टर स्केल होता है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल (rector magnitude test scale) भी पुकारा जाता है।

भूकंप की माप इसके केंद्र यानी एपीसेंटर (epicenter) से की जाती है। यह तो हम आपको बता ही चुके हैं कि भूकंप के दौरान धरती के भीतर से बड़े पैमाने पर ऊर्जा निकलती है,

भूकंप की तीव्रता की माप इसी ऊर्जा की माप से होती है, जिससे भूकंप की भयावहता का अंदाजा होता है। आपको बता दें कि रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है.

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